काशी विश्वनाथाष्टकम्
गंगा तरंग रमणीय जटा कलापंगौरी निरंतर विभूषित वाम भागंनारायण प्रियमनंग मदापहारंवाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ 1 ॥ वाचामगोचरमनेक गुण स्वरूपंवागीश विष्णु सुर सेवित पाद पद्मंवामेण विग्रह वरेन कलत्रवंतंवाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ 2 ॥ भूतादिपं भुजग भूषण भूषितांगंव्याघ्रांजिनां बरधरं, जटिलं, त्रिनेत्रंपाशांकुशाभय वरप्रद शूलपाणिंवाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ 3 ॥ सीतांशु शोभित किरीट विराजमानंबालेक्षणातल विशोषित पंचबाणंनागाधिपा […]