स्तोत्रम्
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स्तोत्रम्
शिव स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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काशी विश्वनाथाष्टकम्
गंगा तरंग रमणीय जटा कलापंगौरी निरंतर विभूषित वाम भागंनारायण प्रियमनंग मदापहारंवाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ 1 ॥ वाचामगोचरमनेक गुण स्वरूपंवागीश
शिव स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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चंद्रशेखराष्टकम्
चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर पाहिमाम् ।चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर रक्षमाम् ॥ (2) रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृंग निकेतनंशिंजिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।क्षिप्रदग्द पुरत्रयं
लक्ष्मी स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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कनकधारा स्तोत्रम्
वंदे वंदारु मंदारमिंदिरानंदकंदलम् ।अमंदानंदसंदोह बंधुरं सिंधुराननम् ॥ अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयंतीभृंगांगनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।अंगीकृताखिलविभूतिरपांगलीलामांगल्यदास्तु मम मंगलदेवतायाः ॥ 1 ॥ मुग्धा मुहुर्विदधती
शिव स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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शिवाष्टकम्
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं सदानंद भाजाम् । भवद्भव्य भूतेश्वरं भूतनाथं, शिवं शंकरं शंभु मीशानमीडे ॥ 1 ॥ गले
लक्ष्मी स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं
शिव स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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श्री रुद्रं – चमकप्रश्नः
ॐ अग्ना॑विष्णो स॒जोष॑से॒माव॑र्धंतु वां॒ गिरः॑ । द्यु॒म्नैर्वाजे॑भि॒राग॑तम् । वाज॑श्च मे प्रस॒वश्च॑ मे॒ प्रय॑तिश्च मे॒ प्रसि॑तिश्च मे धी॒तिश्च॑ मे क्रतु॑श्च मे॒
लक्ष्मी स्तोत्रम्
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महा लक्ष्म्यष्टकम्
इंद्र उवाच – नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 1 ॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुर भयंकरि ।सर्वपापहरे
शिव स्तोत्रम्
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श्री रुद्रं नमकम्
कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिताचतुर्थं-वैँश्वदेवं कांडं पंचमः प्रपाठकः ॐ नमो भगवते॑ रुद्रा॒य ॥नम॑स्ते रुद्र म॒न्यव॑ उ॒तोत॒ इष॑वे॒ नमः॑ ।नम॑स्ते अस्तु॒ धन्व॑ने
शिव स्तोत्रम्
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श्री रुद्रं लघुन्यासम्
ॐ अथात्मानग्ं शिवात्मानं श्री रुद्ररूपं ध्यायेत् ॥ शुद्धस्फटिक संकाशं त्रिनेत्रं पंच वक्त्रकम् । गंगाधरं दशभुजं सर्वाभरण भूषितम् ॥ नीलग्रीवं शशांकांकं
लक्ष्मी स्तोत्रम्
स्तोत्रम्
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श्री सूक्तम्
ओम् ॥ हिर॑ण्यवर्णां॒ हरि॑णीं सु॒वर्ण॑रज॒तस्र॑जाम् । चं॒द्रां हि॒रण्म॑यीं-लँ॒क्ष्मीं जात॑वेदो म॒माव॑ह ॥ तां म॒ आव॑ह॒ जात॑वेदो ल॒क्ष्मीमन॑पगा॒मिनी᳚म् । यस्यां॒ हिर॑ण्यं-विँं॒देयं॒ गामश्वं॒
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