स्तोत्र
मराठी
English
తెలుగు
हिन्दी
অসমীয়া
ગુજરાતી
ಕನ್ನಡ
മലയാളം
मराठी
বাংলা
ਪੰਜਾਬੀ
ଓଡିଆ
සිංහල
தமிழ்
संस्कृतम्
Dark
Light
Blog Post
Vedasaram
>
News
>
शिव स्तोत्र
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
31
शत रुद्रीयम्
व्यास उवाच प्रजा पतीनां प्रथमं तेजसां पुरुषं प्रभुम् । भुवनं भूर्भुवं देवं सर्वलोकेश्वरं प्रभुम्॥ 1 ईशानां वरदं पार्थ दृष्णवानसि शंकरम्
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
32
आनंद लहरि
भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिर्न वदनैः प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथनः पंचभिरपि । न षड्भिः सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपतिः तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसरः ॥ 1॥ घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
19
श्री सांब सदाशिव अक्षरमाला स्तोत्रम् (मातृक वर्णमालिका स्तोत्रम्)
सांबसदाशिव सांबसदाशिव सांबसदाशिव सांबशिव ॥ अद्भुतविग्रह अमराधीश्वर अगणितगुणगण अमृतशिव ॥ आनंदामृत आश्रितरक्षक आत्मानंद महेश शिव ॥ इंदुकलाधर इंद्रादिप्रिय सुंदररूप सुरेश
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
27
श्री शिव चालीसा
दोहा जै गणेश गिरिजासुवन । मंगलमूल सुजान ॥ कहातायोध्यादासतुम । दे उ अभयवरदान ॥ चौपायि जै गिरिजापति दीनदयाल । सदाकरत
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
29
नटराज स्तोत्रं (पतंजलि कृतम्)
अथ चरणशृंगरहित श्री नटराज स्तोत्रं सदंचित-मुदंचित निकुंचित पदं झलझलं-चलित मंजु कटकम् । पतंजलि दृगंजन-मनंजन-मचंचलपदं जनन भंजन करम् । कदंबरुचिमंबरवसं परममंबुद
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
19
शिवसंकल्पोपनिषत् (शिव संकल्पमस्तु)
येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत् परिगृहीतममृतेन सर्वम् । येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ॥ 1॥ येन कर्माणि प्रचरंति धीरा यतो
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
46
श्री शिव आरती
सर्वेशं परमेशं श्रीपार्वतीशं वंदेऽहं विश्वेशं श्रीपन्नगेशम् । श्रीसांबं शंभुं शिवं त्रैलोक्यपूज्यं वंदेऽहं त्रैनेत्रं श्रीकंठमीशम् ॥ 1॥ भस्मांबरधरमीशं सुरपारिजातं बिल्वार्चितपदयुगलं सोमं
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
22
वैद्यनाथाष्टकम्
श्रीरामसौमित्रिजटायुवेद षडाननादित्य कुजार्चिताय । श्रीनीलकंठाय दयामयाय श्रीवैद्यनाथाय नमःशिवाय ॥ 1॥ शंभो महादेव शंभो महादेव शंभो महादेव शंभो महादेव । शंभो
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
30
द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्रम्
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चंद्रकलावतंसम् । भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ॥ 1॥ श्रीशैलशऋंगे विबुधातिसंगे तुलाद्रितुंगेऽपि मुदा वसंतम् । तमर्जुनं
शिव स्तोत्र
स्तोत्र
0
26
श्रीकाशीविश्वनाथस्तोत्रम्
कंठे यस्य लसत्करालगरलं गंगाजलं मस्तके वामांगे गिरिराजराजतनया जाया भवानी सती । नंदिस्कंदगणाधिराजसहिता श्रीविश्वनाथप्रभुः काशीमंदिरसंस्थितोऽखिलगुरुर्देयात्सदा मंगलम् ॥ 1॥ यो देवैरसुरैर्मुनींद्रतनयैर्गंधर्वयक्षोरगै- र्नागैर्भूतलवासिभिर्द्विजवरैः
1
2
3
4
5